चाय अमृत या जहर ? Chai Peene Ke Nuksan

chai peene ke nuksan
Chai peene ke Nuksan

चाय अमृत या जहर ? Chai Peene Ke Nuksan - 

चाय हम पर इतनी हावी हो चुकी है कि हम लोग चाय के बिना ज़िंदगी सोच भी नहीं सकते ! हम सुबह शाम बस चाय ही पीते रहते हैं ! अगर हम अपने घर आए मेहमान को चाय न पूछें तो उसे लगता है कि इन्होने मेरी सेवा ही नहीं कि ! पर क्या आप जानते है कि चाय हमारे देश कि नहीं है चाय को गोरे अपने साथ लेकर आए थे जब वो हमपर राज करने आए थे ! उसके एक कारण है कि वहां ठण्ड बहुत पड़ती थी जिसकी वजह से उनका ब्लड प्रेसर भी काफी कम हो जाता था इस लिए उन्हें ज़िंदगी जीने के लिए चाय का सहारा लेना पड़ता था ! यही कारण था कि गोरे चाय को भी अपने साथ भारत ले आए ! जहाँ भी जो बड़े अंग्रेज अफसर थे वो पहाड़ी ठंडे इलाकों में रहते थे जिसकी वजह से वो चाय का सेवन करते थे ! मगर हम लोग एक तो हमारे देश में इतनी गर्मी पड़ती है दूसरा हम गिलास भर भर के चाय पी रहे है जिसकी वजह से हमारे पेट कि अम्लता बढ़ती है पेट कि अम्लता बढ़ने के कारण हमारे खून कि अम्लता भी बढ़ती है ये अम्लता बढ़ने के कारण 80 से भी ज्यादा बीमारियां हमे हो सकती हैं जिसमे से हाई ब्लड प्रेसर भो एक है ।

अब बात करते है कि किन किन लोगों के लिए चाय अमृत है और किन लोगों के लिए जहर - 

जो लोग ज्यादा ठंडे इलाकों में रहते हैं उन के लिए चाय अमृत है और जो लोग गर्मी में रहते है उनके लिए चाय जहर है ! मगर हम भारत में दिसंबर जनवरी में चाय ले सकते हैं क्यूंकि तब जहाँ ठण्ड पड़ती है 
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